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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 64 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 17

9.64.17

Mantra ID: 9.64.17

म॒र्मृ॒जा॒नास॑ आ॒यवो॒ वृथा॑ समु॒द्रमिन्द॑वः । अग्म॑न्नृ॒तस्य॒ योनि॒मा ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.64.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मसले जाते हुए एवं गतिशील सोम बिना कारण ही अंतरिक्ष एवं जलपात्र की ओर जाते हैं. (१७)

EN English Translation

The moving and moving mons go towards space and water bodies without any reason. (17)

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