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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 64 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 7

9.64.7

Mantra ID: 9.64.7

पव॑मानस्य विश्ववि॒त्प्र ते॒ सर्गा॑ असृक्षत । सूर्य॑स्येव॒ न र॒श्मयः॑ ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.64.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सबको देखने वाले एवं छनते हुए सोम! तुम्हारी बनती हुई धारें इस समय सूर्य किरणों के समान चमकती हुई निर्मित होती हैं. (७)

EN English Translation

O all the seers and seers, Mon! The edges you make are made at this time shining like the sun rays. (7)

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