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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 65 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 65 • ऋचा / मन्त्र 11

9.65.11

Mantra ID: 9.65.11

तं त्वा॑ ध॒र्तार॑मो॒ण्यो॒३॒ः॑ पव॑मान स्व॒र्दृश॑म् । हि॒न्वे वाजे॑षु वा॒जिन॑म् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.65.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे छनते हुए सोम! तुम द्यावा-पृथिवी के धारणकर्तता, सबके द्रष्टा व शक्तिशाली हो. मैं तुम्ह युद्धों में भेजता हूं. (११)

EN English Translation

That's it, Mon! You are the visionary of the earth, the seer and the mighty of all. I'll send you to the wars. (11)

卐 HinduText AI