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9.75.1
अ॒भि प्रि॒याणि॑ पवते॒ चनो॑हितो॒ नामा॑नि य॒ह्वो अधि॒ येषु॒ वर्ध॑ते । आ सूर्य॑स्य बृह॒तो बृ॒हन्नधि॒ रथं॒ विष्व॑ञ्चमरुहद्विचक्ष॒णः ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.75.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अन्न के लिए हितकारी सोम संसार के प्रिय एवं नीचे बहने वाले जलों के चारों ओर टपकते हैं. महान् सोम जलों के भीतर बढ़ते हैं. सबको देखने वाले सोम महान् सूर्य के विशाल एवं सब ओर चलने वाले रथ पर चढ़ते हैं. (१)
EN English Translation
The beneficial mons for food drip around the beloved and flowing waters of the world. Great som grows within the waters. The Soms who see all climb the huge and all-round chariot of the great sun. (1)