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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 75 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 75 • ऋचा / मन्त्र 3

9.75.3

Mantra ID: 9.75.3

अव॑ द्युता॒नः क॒लशा॑ँ अचिक्रद॒न्नृभि॑र्येमा॒नः कोश॒ आ हि॑र॒ण्यये॑ । अ॒भीमृ॒तस्य॑ दो॒हना॑ अनूष॒ताधि॑ त्रिपृ॒ष्ठ उ॒षसो॒ वि रा॑जति ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.75.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञ का दोहन करने वाले ऋत्विज्‌ दीप्तिशाली एवं नेताओं द्वारा स्वर्णमय चमड़े पर रखे गए सोम को निचोड़ते हैं. सोम शब्द करते हुए ट्रोणकलश की ओर जाते हैं. तीनों सवनों में वर्तमान सोम यज्ञ के दिन प्रातःकाल सुशोभित होते हैं. (३)

EN English Translation

The devotees exploiting the yajna squeeze the mon placed on golden leather by the bright and the leaders. The word Som goes towards the tronkalsh while doing the word. In all the three saavans, the present day of Som Yajna is adorned in the morning. (3)

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