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9.76.3
इन्द्र॑स्य सोम॒ पव॑मान ऊ॒र्मिणा॑ तवि॒ष्यमा॑णो ज॒ठरे॒ष्वा वि॑श । प्र णः॑ पिन्व वि॒द्युद॒भ्रेव॒ रोद॑सी धि॒या न वाजा॒ँ उप॑ मासि॒ शश्व॑तः ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.76.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे पवमान सोम! तुम बढ़ते हुए अपनी बहुत सी धाराओं द्वारा इंद्र के पेट में घुसो. बिजली जिस प्रकार बादलों का दोहन करती है, उसी प्रकार तुम अपने कर्मो द्वारा द्यावा- पृथिवी का दोहन करके हमें अधिक अन्न देते हो. (३)
EN English Translation
O Pawman Mon! You enter Indra's belly by growing your lot of streams. Just as electricity exploits the clouds, you give us more food by exploiting the earth through your deeds. (3)