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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 8 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 8 • ऋचा / मन्त्र 4

9.8.4

Mantra ID: 9.8.4

मृ॒जन्ति॑ त्वा॒ दश॒ क्षिपो॑ हि॒न्वन्ति॑ स॒प्त धी॒तयः॑ । अनु॒ विप्रा॑ अमादिषुः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.8.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! दस उंगलियां तुम्हारी सेवा करती हैं. सात होता तुम्हें प्रसन्न करते हैं. मेधावी स्तोता तुम्हें प्रमत्त करते हैं. (४)

EN English Translation

Hey Mon! Ten fingers serve you. Seven would have pleased you. The brilliant hymns will impress you. (4)

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