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9.80.3
एन्द्र॑स्य कु॒क्षा प॑वते म॒दिन्त॑म॒ ऊर्जं॒ वसा॑नः॒ श्रव॑से सुम॒ङ्गलः॑ । प्र॒त्यङ्स विश्वा॒ भुव॑ना॒भि प॑प्रथे॒ क्रीळ॒न्हरि॒रत्यः॑ स्यन्दते॒ वृषा॑ ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.80.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अत्यधिक नशीले, शक्तिदाता रस को ढकते हुए व शोभन कल्याण देने वाले सोम यजमान को अन्न देने के लिए इंद्र की कोख में निचुड़ते हैं. वे सभी प्राणियों को बढ़ाते हैं. वेदी पर क्रीड़ा करते हुए हरितवर्ण, गतिशाली एवं बरसने वाले सोम टपकते हैं. (३)
EN English Translation
The highly intoxicating, powerful, covering up the juice and giving goodness, somas in Indra's womb to give food to the host. They raise all beings. Playing on the altar, the green-coloured, dynamic and raining mons drip. (3)