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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 82 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 82 • ऋचा / मन्त्र 1

9.82.1

Mantra ID: 9.82.1

असा॑वि॒ सोमो॑ अरु॒षो वृषा॒ हरी॒ राजे॑व द॒स्मो अ॒भि गा अ॑चिक्रदत् । पु॒ना॒नो वारं॒ पर्ये॑त्य॒व्ययं॑ श्ये॒नो न योनिं॑ घृ॒तव॑न्तमा॒सद॑म् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.82.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दीप्तिशाली, वर्षा करने वाले एवं हरितवर्ण सोम निचोड़े गए. राजा के समान दर्शनीय सोम जल को लक्ष्य करके शब्द करते हैं. सोम शुद्ध होकर भेड़ के बालों से बने दशापवित्र की ओर ऐसे जाते हैं. जैसे बाज अपने घोंसले की ओर जाता है. सोम अपने जलपूर्ण स्थान की ओर निचुड़ते हैं. (१)

EN English Translation

The bright, rainy and greenish-coloured somas were squeezed. The king's like-sighted mons make the word by aiming at the water. Som goes purely towards dashapavitra made of sheep's hair. Like the hawk leads to its nest. Mon walks towards his watery place. (1)

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