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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 83 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 83 • ऋचा / मन्त्र 4

9.83.4

Mantra ID: 9.83.4

ग॒न्ध॒र्व इ॒त्था प॒दम॑स्य रक्षति॒ पाति॑ दे॒वानां॒ जनि॑मा॒न्यद्भु॑तः । गृ॒भ्णाति॑ रि॒पुं नि॒धया॑ नि॒धाप॑तिः सु॒कृत्त॑मा॒ मधु॑नो भ॒क्षमा॑शत ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.83.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जल के धारणकर्तता आदित्य सोम के स्थान की रक्षा करते हैं. अदभुत सोम देवों के जन्मों की रक्षा करते हैं एवं पाशों के स्वामी बनकर हमारे शत्रु को पाशों में जकड़ते हैं. अतिशय पुण्यशाली लोग मधुर सोम का रस पान करते हैं. (४)

EN English Translation

The holding of water protects the place of Aditya Som. The wonderful soma protects the births of the gods and becomes the masters of the loops and binds our enemy in the loops. The most virtuous people drink the juice of Madhur Som. (4)

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