Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 85 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 2

9.85.2

Mantra ID: 9.85.2

अ॒स्मान्स॑म॒र्ये प॑वमान चोदय॒ दक्षो॑ दे॒वाना॒मसि॒ हि प्रि॒यो मदः॑ । ज॒हि शत्रू॑ँर॒भ्या भ॑न्दनाय॒तः पिबे॑न्द्र॒ सोम॒मव॑ नो॒ मृधो॑ जहि ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.85.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पवमान सोम! हमें संग्राम की ओर भेजो. तुम देवों में दक्ष, प्रिय एवं मदकारक हो. हम तुम्हारी स्तुति के इच्छुक हैं. तुम हमारे शत्रुओं को मारो एवं हमारे पास आओ. हे इंद्र! तुम सोमरस पिओ और हमारे शत्रुओं को मारो. (२)

EN English Translation

O Pawman Mon! Send us to Sangram. You are skilled, beloved and possessive of gods. We are willing to praise you. Kill our enemies and come to us. O Indra! You drink the somras and kill our enemies. (2)

卐 HinduText AI