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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 85 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 5

9.85.5

Mantra ID: 9.85.5

कनि॑क्रदत्क॒लशे॒ गोभि॑रज्यसे॒ व्य१॒॑व्ययं॑ स॒मया॒ वार॑मर्षसि । म॒र्मृ॒ज्यमा॑नो॒ अत्यो॒ न सा॑न॒सिरिन्द्र॑स्य सोम ज॒ठरे॒ सम॑क्षरः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.85.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शब्द करते हुए एवं द्रोणकलश में स्थित सोम! तुम गायों के दूध-दही में मिलाए जाते हो एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र के पास जाते हो. मसले जाते हुए तुम घोड़े के समान सेवा करने योग्य हो. तुम इंद्र के पेट में टपको. (५)

EN English Translation

O the word and som located in Dronakalash! You are added to the milk and curd of cows and go to dashapavitra made of sheep's hair. You are qualified to serve like a horse. You spill into Indra's stomach. (5)

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