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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 86 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 4

9.86.4

Mantra ID: 9.86.4

प्र त॒ आश्वि॑नीः पवमान धी॒जुवो॑ दि॒व्या अ॑सृग्र॒न्पय॑सा॒ धरी॑मणि । प्रान्तरृष॑यः॒ स्थावि॑रीरसृक्षत॒ ये त्वा॑ मृ॒जन्त्यृ॑षिषाण वे॒धसः॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पवमान सोम! तुम्हारी फैलने वाली, मन के समान वेग वाली, दिव्य एवं दूध से युक्त धाराएं द्रोणकलश में गिरती हैं. हे ऋषियों द्वारा सेवित सोम! तुम्हारा निर्माण करने वाले ऋषि तुम्हारी धाराएं द्रोणकलश के मध्य में कर देते हैं. (४)

EN English Translation

O Pawman Mon! Your spreading, with the same velocity as the mind, the divine and the milk-rich streams fall into the dronaclash. O Mon served by the sages! The sages who build you turn your streams in the middle of dronakalash. (4)

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