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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 86 • Mantra / Rik 46

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 46

9.86.46

Mantra ID: 9.86.46

अस॑र्जि स्क॒म्भो दि॒व उद्य॑तो॒ मदः॒ परि॑ त्रि॒धातु॒र्भुव॑नान्यर्षति । अं॒शुं रि॑हन्ति म॒तयः॒ पनि॑प्नतं गि॒रा यदि॑ नि॒र्णिज॑मृ॒ग्मिणो॑ य॒युः ॥ (४६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.46 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्वर्गलोक को धारण करने वाले, उन्नत एवं नशीले सोम निचोड़े जाते हैं. तीन धाराओं वाले सोम सारे सवनों में घूमते हैं. जब स्तोता रूप वाले सोम की स्तुतियां करते हैं, तब पुरोहित शब्दयुक्त सोम की कामना करते हैं. (४६)

EN English Translation

The noble and intoxicating mons that hold paradise are squeezed. The three-stream mons roam all over the saavans. When the stotas praise the form of Som, the priests wish for the worded som. (46)

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