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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 86 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 6

9.86.6

Mantra ID: 9.86.6

उ॒भ॒यतः॒ पव॑मानस्य र॒श्मयो॑ ध्रु॒वस्य॑ स॒तः परि॑ यन्ति के॒तवः॑ । यदी॑ प॒वित्रे॒ अधि॑ मृ॒ज्यते॒ हरिः॒ सत्ता॒ नि योना॑ क॒लशे॑षु सीदति ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शुद्ध होते हुए, निश्चल एवं वर्तमान सोम का ज्ञान कराने वाली किरणें इधर-उधर चलती हैं. हरे रंग वाले एवं स्थित रहने वाले सोम जब दशापवित्र पर छाने जाते हैं, तब द्रोणकलश में रुकते हैं. (६)

EN English Translation

Being pure, the rays of the motionless and the knowledge of the present Mon move around. The green-coloured and situated Som stops at Dronakalash when he goes to cover the Dashapavittra. (6)

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