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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 88 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 88 • ऋचा / मन्त्र 6

9.88.6

Mantra ID: 9.88.6

ए॒ते सोमा॒ अति॒ वारा॒ण्यव्या॑ दि॒व्या न कोशा॑सो अ॒भ्रव॑र्षाः । वृथा॑ समु॒द्रं सिन्ध॑वो॒ न नीचीः॑ सु॒तासो॑ अ॒भि क॒लशा॑ँ असृग्रन् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.88.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जैसे अंतरिक्ष से बरसने वाली मेघवर्षा एवं नदियां अपने-आप नीचे की ओर जाती हैं, उसी प्रकार यह छनते हुए सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करके द्रोणकलश की ओर जाते हैं. (६)

EN English Translation

Just as the clouds and rivers that rain from space automatically go down, so do these filtering mons cross the dashapavittra made of sheep's hair and go towards Dronakalash. (6)

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