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9.89.1
प्रो स्य वह्निः॑ प॒थ्या॑भिरस्यान्दि॒वो न वृ॒ष्टिः पव॑मानो अक्षाः । स॒हस्र॑धारो असद॒न्न्य१॒॑स्मे मा॒तुरु॒पस्थे॒ वन॒ आ च॒ सोमः॑ ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.89.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
फल वहन करने वाले सोम यज्ञ के मार्गों से आकाश की वर्षा के समान बहते हैं. हजार धाराओं वाले सोम हमारे पास या द्युलोक के पास बैठते हैं. (१)
EN English Translation
The fruits bear the fruits flow like the rain of the sky through the paths of the Som Yajna. Mons with thousand streams sit near us or near Dulok. (1)