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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 93 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 93 • ऋचा / मन्त्र 1

9.93.1

Mantra ID: 9.93.1

सा॒क॒मुक्षो॑ मर्जयन्त॒ स्वसा॑रो॒ दश॒ धीर॑स्य धी॒तयो॒ धनु॑त्रीः । हरिः॒ पर्य॑द्रव॒ज्जाः सूर्य॑स्य॒ द्रोणं॑ ननक्षे॒ अत्यो॒ न वा॒जी ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.93.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

एक साथ सींचने वाली एवं परस्पर बहिनों के समान दस उंगलियां सोम को शुद्ध करती हैं. वे उंगलियां धीर सोम की प्रेरक हैं. हरे रंग वाले सोम सूर्य की पत्नी दिशाओं की ओर जाते हैं. सोम तेज चलने वाले घोड़े के समान द्रोणकलश में जाते हैं. (१)

EN English Translation

Ten fingers, like watering and inter-sisters, together purify the mon. Those fingers are the motivators of Dhir Som. The green-coloured Mons go towards the sun's wife directions. Som goes to Dronakalash like a fast-moving horse. (1)

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