Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
9.95.3
अ॒पामि॒वेदू॒र्मय॒स्तर्तु॑राणाः॒ प्र म॑नी॒षा ई॑रते॒ सोम॒मच्छ॑ । न॒म॒स्यन्ती॒रुप॑ च॒ यन्ति॒ सं चा च॑ विशन्त्युश॒तीरु॒शन्त॑म् ॥ (३)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 9.95.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जैसे पानी की लहरें जल्दी उठती हैं, उसी प्रकार देव स्तुति के लिए शीघ्रता करने वाले स्तोता के मन की स्वामिनी स्तुतियों को सोम की ओर भेजते हैं. सोम को नमस्कार करने वाली स्तुतियां सोम के पास जाती हैं. अभिलाषा करने वाली स्तुतियां अभिलाषा वाले सोम में प्रविष्ट होती हैं. (३)
EN English Translation
Just as the waves of water rise quickly, so the lords of the mind of the stota who hasten to praise god send the hymns to The Mon. The hymns that greet Som go to Soma. The eulogies that desire enter the desireful som. (3)