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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 20

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 20

9.97.20

Mantra ID: 9.97.20

अ॒र॒श्मानो॒ ये॑ऽर॒था अयु॑क्ता॒ अत्या॑सो॒ न स॑सृजा॒नास॑ आ॒जौ । ए॒ते शु॒क्रासो॑ धन्वन्ति॒ सोमा॒ देवा॑स॒स्ताँ उप॑ याता॒ पिब॑ध्यै ॥ (२०)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार बिना रस्सी का, रथरहित व बिना बंधन का घोड़ा सजकर युद्ध में अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है, उसी प्रकार यज्ञ में बनाए गए एवं दीप्त सोम जल्दी से द्रोणकलश की ओर जाते हैं. हे देवो! द्रोणकलश में आने वाले सोम को पीने के लिए हमारे पास आओ. (२०)

EN English Translation

Just as a horse without rope, without a chariot and without a bond achieves its goal in battle, so the deep so the lampstanded som made in the yajna quickly goes towards Dronakalash. Oh, God! Come to us to drink the mon who comes to Dronakalash. (20)

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