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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 34

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 34

9.97.34

Mantra ID: 9.97.34

ति॒स्रो वाच॑ ईरयति॒ प्र वह्नि॑रृ॒तस्य॑ धी॒तिं ब्रह्म॑णो मनी॒षाम् । गावो॑ यन्ति॒ गोप॑तिं पृ॒च्छमा॑नाः॒ सोमं॑ यन्ति म॒तयो॑ वावशा॒नाः ॥ (३४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.34 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यजमान तीनों वेदों से संबंधित स्तुतियां बोलता है तथा सोम को यज्ञ को धारण करने वाली एवं कल्याणकारक स्तुतियों की प्रेरणा देता है. गाएं जिस प्रकार सांड़ की ओर जाती हैं, उसी प्रकार गाएं अपने दूध से सोम को मिश्रित करने के लिए जाती हैं. अभिलाषा करते हुए स्तोता सोम के पास जाते हैं. (३४)

EN English Translation

The host speaks the praises related to the three Vedas and inspires Som to have the yajna-bearing and welfare hymns. Just as the cows go towards the bull, similarly the cows go to mix the mon with their milk. While wishing, Stota goes to Som. (34)

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