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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 38

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 38

9.97.38

Mantra ID: 9.97.38

स पु॑ना॒न उप॒ सूरे॒ न धातोभे अ॑प्रा॒ रोद॑सी॒ वि ष आ॑वः । प्रि॒या चि॒द्यस्य॑ प्रिय॒सास॑ ऊ॒ती स तू धनं॑ का॒रिणे॒ न प्र यं॑सत् ॥ (३८)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.38 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार संवत्सर सूर्य के पास जाता है, उसी प्रकार शुद्ध होते हुए सोम इंद्र के पास जाते हैं एवं द्यावा-पृथिवी दोनों को अपनी महिमा से पूर्ण करते हैं. सोम अपने तेज से अंधकारों का नाश करते हैं. जिस प्यारे सोम की अत्यंत प्रिय धाराएं रक्षा करती हैं, वह हमें इस प्रकार धन दें, जिस प्रकार सेवक को वेतन मिलता है. (३८)

EN English Translation

Just as Samvatsar goes to the sun, so, being cleansed, Som goes to Indra and completes both Dyava-Prithvi with his glory. Mon destroys the darknesses with his swiftness. The beloved Som, whom the most beloved streams protect, should give us money in such a way that the servant gets a salary. (38)

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