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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 99 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 99 • ऋचा / मन्त्र 2

9.99.2

Mantra ID: 9.99.2

अध॑ क्ष॒पा परि॑ष्कृतो॒ वाजा॑ँ अ॒भि प्र गा॑हते । यदी॑ वि॒वस्व॑तो॒ धियो॒ हरिं॑ हि॒न्वन्ति॒ यात॑वे ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.99.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

रात बीतने पर जलों से सुशोभित सोम अन्नों को लक्ष्य करके जाते हैं. सेवा करने वाले यजमान की कर्म करने वाली दस उंगलियां हरे रंग के सोम को पात्र में भेजती हैं. (२)

EN English Translation

As the night passes, the mons adorned with water go aiming at the grains. The ten fingers that perform the deeds of the serving host send the green mon into the vessel. (2)

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