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15.9.2
कविमिव प्रशँस्यं यं देवास इति द्विता । नि मर्त्येष्वादधुः ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
सामवेद मन्त्र 15.9.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
देवताओं ने कवि की भांति दो रूपों (गार्हपत्य और आहवनीय) में मनुष्यों में अग्नि को प्रतिष्ठित किया. (२)
EN English Translation
The gods, like poets, distinguished agni among human beings in two forms (garhapatya and ahvanya). (2)