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ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) • अध्याय 1, मन्त्र 16

Ishavasya Upanishad (Isha) • शुक्ल यजुर्वेद (Shukla Yajurveda)

ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) • अध्याय 1 • मन्त्र 16

Ishavasya Upanishad (Isha) 1.16

Mantra: 1.16 [Ishopanishad_1.16]

पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह तेजः । यत्ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥ १६॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सब के पुष्ट करने वाले ! हे एक द्रष्टा ! हे न्यायकर्ता ! हे सर्व प्रेरक अंतर्यामी! हे प्रजा रक्षक राजाधिराज परमेश्वर ! आप अपनी किरणों को फैला दें, और अपने तेज को मेरे दर्शन योग्य बना दें, ताकि आपकी कृपा से हम आप के अति कल्याणकारी रूप का साक्षात्कार कर सकें। अर्थात् आप मुझे इस योग्य बना दें कि मैं आपके प्रेम में मग्न हो कर आप के अतिरिक्त स्वयं को भी न देख सकूँ ॥१६॥