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Katha Upanishad (Kathopanishad) 4.14
यथोदकं दुर्गे वृष्टं पर्वतेषु विधावति। एवं धर्मान्पृथक्पश्यंस्तानेवानुविधावति ॥ १४॥
HinduText AI से इस उपनिषद मन्त्र का ब्रह्मज्ञान समझें
उपनिषद मन्त्र संख्या 14 का आध्यात्मिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
निम्न देशोंमें) बह जाता है उसी प्रकार आत्माओंको पृथक्-पृथक्
देखकर जीव उन्हींको (भिन्नात्मत्वको ही) प्राप्त होता है ॥ १४॥