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Katha Upanishad (Kathopanishad) 6.12
नैव वाचा न मनसा प्राप्तुं शक्यो न चक्षुषा। अस्तीति ब्रुवतोऽन्यत्र कथं तदुपलभ्यते॥ १२॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 12 का आध्यात्मिक रहस्य