Popular:

केनोपनिषद् • खण्ड 1, मन्त्र 2

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 1 • मन्त्र 2

Kena Upanishad 1.2

Mantra: 1.2 [Kenopanishad_1.2]

श्रोत्रस्य श्रोत्रं मनसो मनो यद्वाचो ह वाचं स उ प्राणस्य प्राणः । चक्षुषश्चक्षुरतिमुच्य धीराः प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति ॥ २॥

卐

HinduText AI से इस उपनिषद मन्त्र का ब्रह्मज्ञान समझें

उपनिषद मन्त्र संख्या 2 का आध्यात्मिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

आचार्य ने उत्तर दिया:

हे शिष्य ! सारी इन्द्रियों को प्रेरणा देने वाला परमात्मा है, वह कानों का कान है, मन का मन है, निश्चय ही वाणी का वाणी है, वह प्राण का प्राण है, आँखों की आंख है, धीर पुरूष ऐसा जानकर इस लोक से मर कर अमृत अर्थात् मुक्त हो जाते हैं। ॥२॥
卐 HinduText AI