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केनोपनिषद् • खण्ड 1, मन्त्र 8

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 1 • मन्त्र 8

Kena Upanishad 1.8

Mantra: 1.8 [Kenopanishad_1.8]

यत्प्राणेन न प्राणिति येन प्राणः प्रणीयते । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ॥८॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 8 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो ब्रह्म श्वास लेकर नहीं जीता, किन्तु जिसकी शक्ति से श्वास आता जाता है, तुम उसी को ब्रह्म समझो । प्राणोपासक जिसको ब्रह्म समझते वह ब्रह्म नहीं है । ॥८॥
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