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Kena Upanishad 3.12
स तस्मिन्नेवाकाशे स्त्रियमाजगाम बहुशोभमानामुमाँ हैमवतीं ताँहोवाच किमेतद्यक्षमिति ॥ १२॥
HinduText AI से इस उपनिषद मन्त्र का ब्रह्मज्ञान समझें
उपनिषद मन्त्र संख्या 12 का आध्यात्मिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
आशय यह है कि स्थूल इन्द्रियां कभी ब्रह्म को प्राप्त कर ही नहीं सकतीं, किन्तु आत्मा भी बिना सूक्ष्म बुद्धि की सहायता के उस अविनाशी प्रभु को प्राप्त नहीं कर सकती। इससे से यह भी विदित होता है कि तत्वों में प्रधान अग्नि और वायु तत्व भी उसी परमपिता ब्रह्मारूप परमात्मा के सामर्थ्य से शक्ति प्राप्त करते हैं अन्यथा स्वयं इनमें एक तिनके को जलाने और उड़ाने तक का सामर्थ्य नहीं है।