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केनोपनिषद् • खण्ड 4, मन्त्र 2

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 4 • मन्त्र 2

Kena Upanishad 4.2

Mantra: 4.2 [Kenopanishad_4.2]

तस्माद्वा एते देवा अतितरामिवान्यान्देवान्यदग्निर्वायुर्इन्द्रस्ते ह्येनन्नेदिष्ठं पस्पर्शुस्ते ह्येनत्प्रथमो विदाञ्चकार ब्रह्मेति ॥ २॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 2 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्निदेव, वायुदेव, तथा इन्द्रदेव, समस्त देवताओं में अग्रगण्य है क्योंकि इन देवताओं ने ही सर्वप्रथम ब्रह्म का समीपस्थ्य प्राप्त किया था और उन्होंने ही सबसे पहले यह ब्रह्म है, ऐसा जाना था। ॥२॥
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