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केनोपनिषद् • खण्ड 4, मन्त्र 6

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 4 • मन्त्र 6

Kena Upanishad 4.6

Mantra: 4.6 [Kenopanishad_4.6]

तद्ध तद्वनं नाम तद्वनमित्युपासितव्यं स य एतदेवं वेदाभि हैनं सर्वाणि भूतानि संवाञ्छन्ति ॥ ६॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 6 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

निश्चय ही ब्रह्म भजनीय है, इसलिये सेवनीय ब्रह्म की ही उपासना करनी चाहिये, जो मनुष्य ब्रह्म को इस प्रकार जानकर उसकी आराधना करता है। उसको सभी प्राणी चाहते हैं और प्यार करते हैं। ॥६॥
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