Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
10.2.14
को अ॑स्मिन्य॒ज्ञम॑दधा॒देको॑ दे॒वोऽधि॒ पूरु॑षे । को अ॑स्मिन्त्स॒त्यं कोऽनृ॑तं॒ कुतो॑ मृ॒त्युः कुतो॒ऽमृत॑म् ॥ (१४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 10.2.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
किस प्रधान देव ने इस पुरुष में यज्ञ रूप कर्म को स्थापित किया है? इस में सत्य, असत्य, अमृत और मृत्यु की स्थापना किस ने की? (१४)
EN English Translation
Which chief god has established yajna form karma in this man? Who established truth, untruth, nectar and death in this? (14)