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10.2.21
ब्रह्म॒ श्रोत्रि॑यमाप्नोति॒ ब्रह्मे॒मं प॑रमेष्ठिनम् । ब्रह्मे॒मम॒ग्निं पूरु॑षो॒ ब्रह्म॑ संवत्स॒रं म॑मे ॥ (२१)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.2.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
ब्रह्म श्रोत्रिय को प्राप्त करता है और ब्रह्म ही परमेष्ठी को प्राप्त करता है. ब्रह्म ही यह पुरुष है और अग्नि को प्राप्त करता है तथा संवत्सर की गणना करता है. (२१)
EN English Translation
Brahma attains shrotriya and Brahma attains Parameshti. Brahman is this man and attains agni and calculates samvatsar. (21)