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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 2 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 2 • मन्त्र 4

10.2.4

Mantra ID: 10.2.4

कति॑ दे॒वाः क॑त॒मे त आ॑स॒न्य उरो॑ ग्री॒वाश्चि॒क्युः पूरु॑षस्य । कति॒ स्तनौ॒ व्यदधुः॒ कः क॑फो॒डौ कति॑ स्क॒न्धान्कति॑ पृ॒ष्टीर॑चिन्वन् ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.2.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे देव कितने थे, जिन्होंने पुरुष के हृदय को और गरदन को बनाया? कितने देवों ने पुरुष के स्तन बनाए. फेफड़ों को किस ने बनाया? कंधों की रचना कितने देवों ने की? पीठ की रचना कितने देवों ने की? (४)

EN English Translation

How many gods were those who made a man's heart and neck? How many gods made man's breasts? Who made the lungs? How many gods created the shoulders? How many devas composed the peetha? (4)

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