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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 2 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 2 • मन्त्र 7

10.2.7

Mantra ID: 10.2.7

हन्वो॒र्हि जि॒ह्वामद॑धात्पुरू॒चीमधा॑ म॒हीमधि॑ शिश्राय॒ वाच॑म् । स आ व॑रीवर्ति॒ भुव॑नेष्व॒न्तर॒पो वसा॑नः॒ क उ॒ तच्चि॑केत ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.2.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अनेक स्थलों को छूने वाली जीभ को ठोड़ी में किस ने स्थापित किया? जीभ में वाणी की स्थापना किस ने की. अपने शरीर के भीतर जल को धारण करता हुआ कौन सा देव प्राणियों में व्याप्त है? उस का जानने वाला कौन है? (७)

EN English Translation

Who installed the tongue touching many places in the chin? Who established speech in the tongue. Which god is present in the creatures holding water within his body? Who knows him? (7)

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