Popular:
अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 4 • Mantra 26

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 4 • मन्त्र 26

10.4.26

Mantra ID: 10.4.26

आ॒रे अ॑भूद्वि॒षम॑रौद्वि॒षे वि॒षम॑प्रा॒गपि॑ । अ॒ग्निर्वि॒षमहे॒र्निर॑धा॒त्सोमो॒ निर॑णयीत् । दं॒ष्टार॒मन्व॑गाद्वि॒षमहि॑रमृत ॥ (२६)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 10.4.26 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नवीन विष भी प्राचीन विष में मिल कर रुक गया है. इस प्रकार विष नष्ट हो चुका है. अग्नि ने सांप के विष को नष्ट कर दिया है. सोम सर्प के विष को दूर ले गया है. काटने वाले सांप को ही उस का विष प्राप्त हुआ, जिस से उस की मृत्यु हो गई. (२६)

EN English Translation

The new poison has also stopped mixed with the ancient poison. Thus the poison has been destroyed. Agni has destroyed snake venom. Som has taken away the snake's venom. The snake that bit him received its venom, due to which he died. (26)

卐 HinduText AI