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10.6.32
यं दे॒वाः पि॒तरो॑ मनु॒ष्या उप॒जीव॑न्ति सर्व॒दा । स मा॒यमधि॑ रोहतु म॒णिः श्रैष्ठ्या॑य मूर्ध॒तः ॥ (३२)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.6.32 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
देव, मनुष्य और पितर सदा जिस मणि के सहारे जीवित रहते हैं, वह मणि मुझे श्रेष्ठ स्थान पर आरोपित करे. (३२)
EN English Translation
May the gem on which God, man and father always live, place me in the best place. (32)