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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 7 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 7 • मन्त्र 11

10.7.11

Mantra ID: 10.7.11

यत्र॒ तपः॑ परा॒क्रम्य॑ व्र॒तं धा॒रय॒त्युत्त॑रम् । ऋ॒तं च॒ यत्र॑ श्र॒द्धा चापो॒ ब्रह्म॑ स॒माहि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.7.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस को आधार बना कर तपस्या का विधान किया जाता है एवं उत्तम वृत्तों का निर्वाह होता है, जिस में सत्य श्रद्धा जल एवं ब्रह्म व्याप्त हैं, उस परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (११)

EN English Translation

On the basis of which the law of penance is made and the best circles are maintained, in which true faith, water and Brahman are prevalent, tell us about that God, who is He? (11)

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