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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 10 • Mantra 19

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 10 • मन्त्र 19

11.10.19

Mantra ID: 11.10.19

स्वप्नो॒ वै त॒न्द्रीर्निरृ॑तिः पा॒प्मानो॒ नाम॑ दे॒वताः॑ । ज॒रा खाल॑त्यं॒ पालि॑त्यं॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन् ॥ (१९)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.10.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नींद, आलस्य, पापदेवता एवं ब्रह्महत्या आदि पापों ने इस शरीर में प्रवेश किया. वृद्धावस्था, नयन आदि का नष्ट होना, त्वचा का ढीला हो जाना आदि के अभिमानी देवों ने शरीर में प्रवेश किया. (१९)

EN English Translation

Sins like sleep, laziness, sin god and brahmahatya etc. entered this body. The arrogant gods of old age, destruction of nayan etc., loosening of skin, etc. entered the body. (19)

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