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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 5 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 5 • मन्त्र 14

11.5.14

Mantra ID: 11.5.14

तत॑श्चैनम॒न्याभ्या॑मष्ठी॒वद्भ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न् । स्रा॒मो भ॑विष्य॒सीत्ये॑नमाह । तं वा अ॒हं ना॒र्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म् । त्वष्टु॑रष्ठी॒वद्भ्या॑म् । ताभ्या॑मेनं॒ प्राशि॑षं॒ ताभ्या॑मेनमजीगमम् । ए॒ष वा ओ॑द॒नः सर्वा॑ङ्गः॒ सर्व॑परुः॒ सर्व॑तनूः । सर्वा॑ङ्ग ए॒व सर्व॑परुः॒ सर्व॑तनूः॒ सं भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१४)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.5.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गुरु अपने शिष्य से इस प्रकार कहें-“हे देवदत्त! पूर्ववर्ती अनुष्ठान करने वाले ऋषियों ने जिन अस्थियुक्त .... अर्थात्‌ हड्डियों वाले घुटनों की सहायता से सेवन किया था, यदि तुम ने उस से भिन्न अर्थात्‌ लौकिक अस्थियुक्त जानुओं अर्थात्‌ हड्डियों वाले घुटनों की सहायता से ओदन का सेवन किया तो तुम्हारे घुटने सूख जाएंगे.” इस के उत्तर के रूप में शिष्य अपने गुरु से कहे-“मैंने इस ओदन का सेवन न पराङ्मुख हो कर किया है न सामने से किया है और न आत्माभिमुख होकर किया है. मैं ने इस ओदन का सेवन देव के घुटनों की सहायता से किया है. उसे वहीं पहुंचा दिया है जहां उसे जाना चाहिए था. यह ओदन समस्त अंगों से युक्त, सभी जोड़ों सहित और संपूर्ण शरीर वाला है, इस विधि से जो ओदन का सेवन करना जानता है, वह समस्त अंगों से युक्त, सभी जोड़ों वाला और संपूर्ण शरीर सहित होता है, वह स्वर्ग आदि पुण्य लोकों में प्रतिष्ठित होता है. (१४)

EN English Translation

The Guru said to his disciple in this way, "O Devdatta! The sages who performed the previous rituals had the ashes.... That is, if you consume odan with the help of knees with bones, if you consume odan with the help of a knee with a different i.e. cosmic bone, then your knees will dry up." I have consumed this odan with the help of Dev's knees. He has been taken to where he should have gone. This odan is full of all the organs, with all the joints and with the whole body, by this method, the one who knows how to consume odan is full of all the organs, with all the joints and with the whole body, he is established in the virtuous worlds of heaven etc. (14)

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