Popular:
अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 14

11.6.14

Mantra ID: 11.6.14

अपा॑नति॒ प्राण॑ति॒ पुरु॑षो॒ गर्भे॑ अन्त॒रा । य॒दा त्वं प्रा॑ण॒ जिन्व॒स्यथ॒ स जा॑यते॒ पुनः॑ ॥ (१४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 11.6.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पुरुष स्त्री के गर्भाशय के मध्य सांस लेता और अपान वायु छोड़ता है. हे प्राण! जब तुम गर्भस्थ श्रूण को पुष्ट करते हो, तब वह जन्म लेता है. (१४)

EN English Translation

The man breathes between the woman's uterus and releases his own air. O soul! When you strengthen the womb, it is born. (14)

卐 HinduText AI