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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 18

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 18

11.6.18

Mantra ID: 11.6.18

यस्ते॑ प्राणे॒दं वे॑द॒ यस्मिं॑श्चासि॒ प्रति॑ष्ठितः । सर्वे॒ तस्मै॑ ब॒लिं ह॑रान॒मुष्मिं॑ल्लो॒क उ॑त्त॒मे ॥ (१८)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.6.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्राण! यह कहा हुआ तुम्हारा माहात्म्य जो जानता है एवं जिस विद्वान्‌ में तुम प्रतिष्ठित रहते हो, उस के लिए सभी देव स्वर्ग में अमृतमय भाग प्रस्तुत करते हैं. (१८)

EN English Translation

O soul! It has been said that for the one who knows your greatness and the scholar in whom you are distinguished, all the gods offer the nectar in heaven. (18)

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