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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 26

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 26

11.6.26

Mantra ID: 11.6.26

प्राण॒ मा मत्प॒र्यावृ॑तो॒ न मद॒न्यो भ॑विष्यसि । अ॒पां गर्भ॑मिव जी॒वसे॒ प्राण॑ ब॒ध्नामि॑ त्वा॒ मयि॑ ॥ (२६)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.6.26 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्राण! आप मुझ से न तो विमुख हों तथा न मुझे त्याग कर अन्यत्र जाएं. जल जिस प्रकार वाडवाग्नि को धारण करते हैं, उसी प्रकार हम अपनी देह में आप को धारण करते हैं. (२६)

EN English Translation

O soul! You should not turn away from me or leave me and go elsewhere. Just as water wears wadvagni, so we wear you in our body. (26)

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