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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 8 • Mantra 16

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 8 • मन्त्र 16

11.8.16

Mantra ID: 11.8.16

अ॒राया॑न्ब्रूमो॒ रक्षां॑सि स॒र्पान्पु॑ण्यज॒नान्पि॒तॄन् । मृ॒त्यूनेक॑शतं ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (१६)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.8.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम दान के प्रतिबंधक हिंसकों, राक्षसों, सर्पो, यातुधानों और पितरों की स्तुति करते हैं. मैं एक से एक मृत्युओं की स्तुति करता हूं. वे मुझे पाप से मुक्त करें. (१६)

EN English Translation

We praise the banned violent, demons, serpents, yatudhans and ancestors of charity. I praise one death after another. May they free me from sin. (16)

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