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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13

Kanda 13 • Sukta 5

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Mantra 13.5.1

की॒र्तिश्च॒ यश॒श्चाम्भ॑श्च॒ नभ॑श्च ब्राह्मणवर्च॒सं चान्नं॑ चा॒न्नाद्यं॑ च । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (१)

हि हिन्दी अनुवाद

कीर्ति, यश, आकाश, जल, ब्रह्मवर्चस्‌ अर्थात्‌ ब्रह्म तेज अन्न और अन्न को पचाने की क्रिया उसे ही प्राप्त होती है, जो इन एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म का ज्ञाता है. (१)

EN English Translation

He gets the action of digesting fame, fame, sky, water, Brahmavarchas i.e. Brahma tej food and food, which is the knower of these ekvrit i.e. Brahma. (1)

Mantra 13.5.2

न द्वि॒तीयो॒ न तृ॒तीय॑श्चतु॒र्थो नाप्यु॑च्यते । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (२)

हि हिन्दी अनुवाद

इन एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म का ज्ञाता द्वितीय, तृतीय चतुर्थ नहीं कहलाता. (२)

EN English Translation

These ekvrit i.e. the knower of Brahman is not called second, third fourth. (2)

Mantra 13.5.3

न प॑ञ्च॒मो न ष॒ष्ठः स॑प्त॒मो नाप्यु॑च्यते । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (३)

हि हिन्दी अनुवाद

इन एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म का ज्ञाता पंचम, षष्ठ अथवा सप्तम नहीं कहलाता है. (३)

EN English Translation

These ekvrit i.e. the knower of Brahman is not called fifth, sixth or seventh. (3)

Mantra 13.5.4

नाष्ट॒मो न न॑व॒मो द॑श॒मो नाप्यु॑च्यते । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (४)

हि हिन्दी अनुवाद

जो इन एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म का ज्ञाता है वह अष्टम, नवम नहीं कहलाता है. (४)

EN English Translation

The one who is the knower of these ekkerts i.e. Brahman is not called the eighth, ninth. (4)

Mantra 13.5.5

स सर्व॑स्मै॒ वि प॑श्यति॒ यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (५)

हि हिन्दी अनुवाद

इन एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म का ज्ञाता स्थावर और जंगम सभी को देखने वाला होता है. (५)

EN English Translation

The knower of Brahma is the one who sees all the real and movable. (5)

Mantra 13.5.6

स सर्व॑स्मै॒ वि प॑श्यति॒ यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (६)

हि हिन्दी अनुवाद

वह असाधारण एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म ही है, यह सब उसे ही प्राप्त होता है. (६)

EN English Translation

He is the extraordinary ekavrut i.e. Brahman, all this he gets. (6)

Mantra 13.5.7

तमि॒दं निग॑तं॒ सहः॒ स ए॒ष एक॑ एक॒वृदेक॑ ए॒व । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (७)

हि हिन्दी अनुवाद

ये सब देव उस ब्रह्म में एक रूप होते हैं, जो एक व्रत को जानता है. (७)

EN English Translation

All these gods are a form in that Brahman, who knows a fast. (7)