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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 5 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 5 • मन्त्र 7

13.5.7

Mantra ID: 13.5.7

तमि॒दं निग॑तं॒ सहः॒ स ए॒ष एक॑ एक॒वृदेक॑ ए॒व । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.5.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये सब देव उस ब्रह्म में एक रूप होते हैं, जो एक व्रत को जानता है. (७)

EN English Translation

All these gods are a form in that Brahman, who knows a fast. (7)

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