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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 2 • Mantra 54

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 2 • मन्त्र 54

14.2.54

Mantra ID: 14.2.54

बृह॒स्पति॒नाव॑सृष्टां॒ विश्वे॑ दे॒वा अ॑धारयन् । तेजो॒ गोषु॒ प्रवि॑ष्टं॒यत्तेने॒मां सं सृ॑जामसि ॥ (५४)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.2.54 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति की रची हुई इस ओषधि को विश्वे देवों ने पुष्ट किया है. हम इसे उस तेज से संयुक्त करते हैं जो गायों में प्रवेश कर गया है. (५४)

EN English Translation

This medicine composed by Jupiter has been confirmed by the Vishwa Devas. We combine it with the fast that has entered the cows. (54)

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