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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 2 • Mantra 63

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 2 • मन्त्र 63

14.2.63

Mantra ID: 14.2.63

इ॒यं नार्युप॑ब्रूते॒ पूल्या॑न्यावपन्ति॒का । दी॒र्घायु॑रस्तु मे॒ पति॒र्जीवा॑ति श॒रदः॑ श॒तम् ॥ (६३)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.2.63 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि में खीलों की आहुति देती हुई यह वधू कामना करती है कि मेरा पति दीर्घ आयु वाला हो और सौ वर्ष तक जीवित रहे. (६३)

EN English Translation

Sacrificing cucumbers in the agni, this bride wishes that my husband is long-lived and lives for a hundred years. (63)

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