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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 11 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 11 • मन्त्र 3

15.11.3

Mantra ID: 15.11.3

यदे॑न॒माह॒व्रात्य॒ क्वावात्सी॒रिति॑ प॒थ ए॒व तेन॑ देव॒याना॒नव॑ रुन्द्धे ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.11.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह कहने पर कि हे व्रात्य! तुम कहां रहोगे? देवयान मार्ग ही खुल जाता है. (३)

EN English Translation

On saying that O Swami! Where will you stay? The Devayan route opens. (3)

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